February 27, 2010

हाँकी का महासंग्राम......

क्रिकेट के छक्के चौके से दूर अब वक़्त आ गया है, हाँकी का । 28 फरवरी 2010 को हाँकी का महासंग्राम शुरू हो जायेगा और जिसके साथ शुरू हो जाएगी एक जंग जिस पर लाखों खेल प्रेमी नजर लगाये बैठे हैं । यह महासंग्राम सिर्फ हाँकी का नहीं है, ये महासंग्राम है, भारतीय हाँकी के अस्तित्व का, यह वही हाँकी है जिसने ध्यानचंद, कैप्टेन रूपसिंह, अजीतपाल सिंह, उधम सिंह, अशोक कुमार, परगट सिंह, धनराज पिल्लई तक कई महान खिलाडयों को जन्म दिया। यह वही हाकी है जिसने हमारे लिए ओलंपिक में 8 स्वर्ण पदक जीते है। यह वही स्वर्णिम युग था हमारी हाँकी का, जिसमे सारी दुनिया ने भारतीय हाँकी का लोहा मान लिया। सन 1928 से 1956 तक तो भारतीय हाँकी अजेय रही थी और लगातार 6 ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते थे। आज भी जब हम अपने हाकी .इतिहास को देखते है तो हमें गर्व होता है कि धन्य है हम कि हमारे भारत ने हाँकी में 8 स्वर्ण पदक जीते है। लेकिन आज वही हाकी जिसने ध्यानचंद को जन्म दिया आज वो अपने वजूद कि लड़ाई लड़ रही है आज आये दिन कोई ना कोई विवाद इसके साथ जुड़ जाता है। ये खेल कहाँ से कहाँ तक पहुच गया है, आज भारतीय हाँकी अपने स्वर्णिम युग से धरातल पर आ गयी है। अब तो दूर दूर तक याद ही नहीं रहता कि कब हमारी हाकी टीम ने कोई बड़ी प्रतियोगिता जीती हो। आज हाकी कि ये दुर्दशा हो गयी है कि आज खिलाड़ियों को देने के लिए पैसे नहीं है। हाँकी का महासंग्राम सिरपर खड़ा है और हमारे हाकी के प्रसाशक सरे मुद्दे सुलझाने में लगे है। रोज नए - नए विवाद आ रहे है, कभी कोच कह रहा है कि कप्तान ये होगा और हाकी इंडिया कह रही है कि कप्तान ये होगा और पता नहीं कितने विवाद इस खेल के साथ है जो लोगों को पता नहीं। फिर भी इन सब विवादों के वावजूद भी हमारे खिलाड़ी हिम्मत से इस महासंग्राम के लिए तैयार है । ये महासंग्राम सिर्फ एक विश्वकप नहीं है और ना ही ये एक ट्राफी है बल्कि अब ये एक वजूद कि लड़ाई है जो की आने वाले वक़्त में हाँकी कि तस्वीर और तकदीर तय करेगी। इस महासंग्राम में वैसे तो और भी देश है ,पर जिसकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है वो है भारत की क्यूंकि कुछ समय पहले ही हमारी हाँकी ने ओलंपिक में ना खेल पाने का जो दाग भारतवासियों को दिया है वो अभी तक धुल नहीं पाया है। आज यह मौका है हमारे खिलाड़ियों के लिए जिनके ऊपर दाग लगा हुआ है , उसे धोने का ये लड़ाई सिर्फ अपने कलंक को मिटने के लिए नहीं है ये लड़ाई है भारतीय हाकी को फिर से अपना वही पुराना रुतबा दिलाने कि जिसकी चमक से पूरी दुनिया कि हाँकी चमकती थी। इस महासंग्राम के लिए भारतीय खिलाड़ियों को मेरी तरफ से बहुत सारी शुभकामनायें, आज पूरा देश और भारतीय हाँकी उनकी तरफ एकटक लगा कर देख रही है देश देख रहा है कि ये खिलाड़ी हमारे कलंक को धोये जो ओलम्पिक ना खेल पाने से लगा है, और हाकी देख रही है इस आशा से कि ये खिलाड़ी एक बार फिर से मुझे वही रुतबा दिलाएंगे जिसके लिए मैं जानी जाती थी। हम सभी कि उम्मीदें इन खिलाड़ियों पर लगी है। मैं संपूर्ण भारतवासियों से एक निवेदन करना चाहता हूँ कि वो सभी इस महासंग्राम को देखे क्यूंकि ये महासंग्राम हमारी हाँकी का है। और इसे फिर से अपना पुराना रूप हासिल करने में अपना सहयोग दे और इन खिलाड़ियों के लिए प्रार्थना करे जो इसके लिए अपना सब कुछ लगा दे रहे है। इस अस्तित्व की लड़ाई में मैं अपनी हाकी टीम को बहुत सारी शुभकामनायें देता हूँ।
लेखक - पंकज सिंह
प्रस्तुतकर्ता - देवेश प्रताप

7 comments:

Anonymous said...

mujhe hockey ke baare main jyada nahi pata lekin jab bhi chahe koi bhi khel ho pata chalta hai ki india ki jeet hoti hai toh khushi hoti hai kyunki yeh hamara india hai or yahi chahta hun ki hockey main bhi hum hi jeete best of luck,team india,

नया सवेरा said...

best of luck team india...
chak de phatte

निर्मला कपिला said...

हाकी की टीम को बहुत बहुत शुभकामनायें आपको व आपके परिवार को होली की भी शुभकामनायें

श्याम कोरी 'उदय' said...

.... प्रभावशाली अभिव्यक्ति, टीम इंडिया को शुभकामनाएं !!

Parul said...

ye hamara rashtriya khel hai aur humko chahiye ki hum apne khiladiyon ka hosla badhaye..gud luck team india!

Dinbandhu Vats said...

ham sab ko milkar hockey ko badhava dena chahiye.taki hamara rashtriya khel jinda rahe.dhanyavad aapko jisane hockey ki bat ki aur shubhkamanayen hockey team ko

Devendra yadav said...

hame hockey par grav hona chaiye ... chak de india nd all yhe best.

एक नज़र इधर भी

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