February 20, 2010

तन्हाई कहती है .....

देवेश प्रताप

तन्हाई अपनी व्यथा सुनाते हुए कहती है ......

अक्सर वो मुझसे ख़फा रहते है
जाने क्यों मुझसे जुदा रहते है

मैं दामन विछा देती हूँ
उनकी ख़ुशी के लिए
जब उनके जीवन के
फूल मुरझा जाते है

मचल जाती हूँ
उनकी एक हंसी के लिए
सहन होता नहीं ,ये देख कर
जब वो बेवफा के लिए रोया करते है

दौड़ आती हूँ , पास
उनके लाख मना करने पर
खुश होता है मन ,उन्हें देख कर
चैन से जब वो सोया करते है

''तन्हाई'' कह कर मुझे ,वो कोसा करते है
तन्हा मै भी तो हूँ, क्यूँ वो समझा करते है

18 comments:

RaniVishal said...

Waah! kyaa baat hai sundar rachana ..gahare vichaar!!
Badhai

Udan Tashtari said...

वाह!! बहुत सुन्दर!!

निर्मला कपिला said...

'तन्हाई'' कह कर मुझे ,वो कोसा करते है ।
तनहा मै भी तो हूँ, क्यूँ न वो समझा करते है ॥
सही बात है। हम तन्हाई को कोसते हैं जब कि वो उस समय हमारा साथ देतझै जब कोई और हमारे साथ नही होता। सुन्दर कविता शुभकामनायें

Mithilesh dubey said...

बहुत खूब देवेश भाई , आज तो आपने दिल को छू लिया ।

Kulwant Happy said...

दिल को छूते विचारों की रचना।

Ravi Rajbhar said...

Wa-wah...kya khub jabab nahi zanab aapka dil ko sukun mila padha kar.

Rajey Sha said...

तन्‍हाई की नई नई बातें... लि‍खते रहि‍ये। तन्‍हाई पढ़ना लि‍खना अच्‍छी बात है।

दीपक 'मशाल' said...

badhiya kavita rahi bhai Devesh..

somyaa said...

तन्हाई'' कह कर मुझे ,वो कोसा करते है ।
तन्हा मै भी तो हूँ, क्यूँ न वो समझा करते है
--- sach bahut hi khoobsurat panktiyan hain ... kisi ne socha hi na hoga ki tanhai bhi kuch kehti hai...

Apanatva said...

ati sunder bhavo kee abhivykti .........
tanhaee baut kuch kah gayee.............


अक्सर वो मुझसे ख़फा रहते है ।
जाने क्यों मुझसे जुदा रहते है ॥

मैं दामन विछा देती हूँ
उनकी ख़ुशी के लिए
जब उनके जीवन के
फूल मुरझा जाते है ॥

'तन्हाई'' कह कर मुझे ,वो कोसा करते है ।
तन्हा मै भी तो हूँ, क्यूँ न वो समझा करते है ॥

bahut acchee lagee aapkee ye rachana........

दिगम्बर नासवा said...

''तन्हाई'' कह कर मुझे ,वो कोसा करते है ।
तन्हा मै भी तो हूँ, क्यूँ न वो समझा करते है..

सब तन्हाई को कोसते भी हैं पर सभी उसका इंतेज़ार भी करते हैं .... दास्ताने तन्हाई लाजवाब है .......

Arvind Mishra said...

''तन्हाई'' कह कर मुझे ,वो कोसा करते है ।
तन्हा मै भी तो हूँ, क्यूँ न वो समझा करते है ॥

जबरदस्त रचना -बहुत संभावनाएं हैं आपमे भाई

एक गली जहाँ मुडती है said...

tanha mai bhi hu kyu n vo
samjha karte hai .....
bahut khub.......
achhi rachna hai

संगीता पुरी said...

सही है !!

देवेश प्रताप said...

आप सब का बहुत बहुत ......आभार .

किरण राजपुरोहित नितिला said...

बहुत सुन्दर चित्रण . उसके मनोभाव खूब उकेरे है !!

MARC S said...

wah devesh bhai wah!!
maza aa gaya

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर रचना । आभार

एक नज़र इधर भी

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