February 12, 2010

क्या इंसान अपनी सोच को बढ़ावा नहीं दे पे रहा है ?

देवेश प्रताप

इंसान ही इंसान को कैसे कष्ट पहुंचता है दर्द, इंसानों में बंटवारा करना नहीं जनता ,सबको सामान रखता है फिर भी एक इंसान दुसरे इंसान को कष्ट पहुंचाता है अखबार में आज एक ख़बर पढ़ा ......ख़ कुछ ऐसी थी '' पीडी कर रही एक युवती ने अपने पति के साथ दस साल की नौकरानी को केवल बेरहमी से पीटा बल्कि उसके हाथ तवे पर रख जला दिए '' (हिन्दुस्तान) इस ख़बर को पढ़ कर मन में कई प्रशन उठे ,कैसी है ये दुनिया ? आधुनिकता और शिक्षा के बढ़ते कदम के साथ क्या इंसान अपनी सोच को बढ़ावा नहीं दे पे रहा है ? शिक्षा के शिखर पर बैठी एक महिला एक दस साल की बच्ची का हाथ जला देती है, उस युवती के माँ-बाप को बहुत खुशी होती होगी अपनी बेटी को देखकर लेकिन वही बेटी एक दूसरी बेटी को प्रताड़ित कर रही है इंसान अपने इस्तर से नीचे वालों को क्यों गाजर -मुली समझता है , ऐसा लगता है की उन लाचार लोगों की कोई भावनाए नहीं होती ,कोई इच्छाए नहीं होती या फिर कोई सपना नहीं होता ये एक अकेला ऐसा मामला नहीं ऐसी घटनाये आये दिन ख़बरों में होती है , और इन घटनाओ में अक्सर नाबालिग बच्चे और बच्चियां शिकार होती है और सबसे सोचनीय बात तो ये होती है, ऐसे मामले उन घरो से जायदा होते जहाँ शिक्षा और रहन -सहन उच्स्तरिय होता है अफ़सोस ...................................

7 comments:

RaniVishal said...

Aapki chinta vajib hai....manviyata ka patan samst manav jati ki ke liye bhayankartam samsya ban chuka hai!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

somyaa said...

sach! shiksha pa lene ka arth ye nahi ki aap me sanskar aur samajhdari bhi aa gayi ho... kai degrees lekar bhi log janwaron ki tarah lad mar sakte hain aur bina ek akshar padhe bhi insaan pyar ki bhasha samajh sakta hai !

दीपक 'मशाल' said...

भाई ऐसे लोगों की ना सिर्फ पीएच.डी. बल्कि अभी तक की सारी डिग्रियां वापस ले लेनी चाहिए..
जय हिंद... जय बुंदेलखंड...

दिगम्बर नासवा said...

अफ़सोस ..... ऐसे पढ़ने लिखने का क्या फायदा जो इंसान को इंसान न समझ सके ..... जिस दिल में प्रेम नही, इंसानियत नही वो डिग्रियाँ हाँसिल करके भी अनपड़ है और रहेगा .........

RAJNISH PARIHAR said...

SAHI KAHA AAPNE!!!1

श्याम कोरी 'उदय' said...

...परिवर्तन की आशा है!!!

samerpal said...

aapne jis vishay par chinta jatai vo mere dil ko chhu gai. aap sahi kahte hain ki aisi neechta ka kaam keval uchcha varg ke log hi karte hain jo padhe likhe bahut jyada hote hain. vo keval apna fayada dhudhte hain usme chahe doosaro ka kitana bhi nukshan kyu hi na ho jaye. aapne is par tippadi kar ke bahut hi achha prabhav chhoda hai sab ke upar!
agar maine kuchh galat bola ho uchcha varg ke liye kripaya maff kar dijiyega. kyuki mai mafi ke patra hu.
jay hind! jay bharat!

एक नज़र इधर भी

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