May 19, 2010

एक जख्म दे जाते है ..........

देवेश प्रताप


वो हर रोज एक जख्म दे जाते हैं

हम उन जख्मों के सहारे जिए जाते हैं ॥


मुझे कोरा कागज समझ कर

अपने दास्तानेब्याँ लिखते हैं ।

लिखते लिखते जब वो थक जाते हैं ।

कागज को टुकड़े टुकड़े कर के चले जाते हैं ॥


मुझे आइना समझ कर वो अपने

दुःख दर्द कहते है ,

आसुंओं कि बारिश को जब भी रोकने

कि कोशिश करता हूँ ।

जाने क्यूँ वो उस बारिश में

भीगना पसंद करते है॥


मैं साहिल कि तरह उनके आने का

इंतज़ार करता हूँ ,

वो लहर बन कर आते तो हैं ॥

पर चंद लम्हों में दूर

चले जाते हैं ॥


हम प्यार के मोती बटोरते रहे

वो उन मोतियों से खेलते रहे ॥


30 comments:

दिलीप said...

waah bahut khoob janaab..

महाशक्ति said...

देवेश जी आपको पहले भी पढ़ा है और आज की कविताओ मे आपके भावो को और भी ज्‍यादा करीब होकर जानने का मौका मिला, एक कविता एक रूप मे इसे मै बहुत अच्‍छा नही कहूँ‍गा किन्‍तु भावोत्‍प्रस्‍तुति के रूप मे सार्थक कहूँगा।

'उदय' said...

हम प्यार के मोती बटोरते रहे
वो उन मोतियों से खेलते रहे ॥
.... बेहद संवेदनात्मक रचना,प्रसंशनीय !!!

निर्मला कपिला said...

गिले शिकवे कहने के लिये अच्छे भावों ाउर शब्दों का संयोजन अच्छा लगा शुभकामनायें

Mithilesh dubey said...

बहुत बढ़िया देवेश भाई , दिल से निकली भावनायें लगी ।

kunwarji's said...

waah!
"हम प्यार के मोती बटोरते रहे वो उन मोतियों से खेलते रहे ॥"

bahut badhiya...

kunwar ji,

RAJNISH PARIHAR said...

कविता के रूपमे अच्छे विचार संजोये है आपने!!!मेरी शुभकामनायें!!!

दिगम्बर नासवा said...

Yahi to daastan hai unki bewafi ki ... bahut hi samvednsheel rchna hai ...

संजय भास्कर said...

काफी सुन्दर शब्दों का प्रयोग किया है आपने अपनी कविताओ में सुन्दर अति सुन्दर

संजय भास्कर said...

फिर से प्रशंसनीय रचना - बधाई

'अदा' said...

हम प्यार के मोती बटोरते रहे
वो उन मोतियों से खेलते रहे ॥

Devesh ji,
aapka bhav sansaar vrihad hai..jo is kavita mein nazar aa raha hai...man ki baat khoobsurati se aapne kah di hai..jo paathakon ke man tak utar gayi hai..
aap badhai ke paatr hain..
dhnywaad..

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

bahut sundar !

sangeeta swarup said...

खूबसूरती से लिखे हैं जज़्बात....सुन्दर अभिव्यक्ति

रचना दीक्षित said...

हर बात दिल से निकली लगती है

EKTA said...

very nice..
bahut khoob likha aapne..

KK Yadava said...

सुन्दर लिखा, दिल के करीब ..मनभावन. ....
___________
'शब्द सृजन की ओर' पर आपका स्वागत है !!

Akanksha~आकांक्षा said...

बहुत बढ़िया लिखा आपने...सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई.
____________________________
'शब्द-शिखर' पर- ब्लागिंग का 'जलजला'..जरा सोचिये !!

ekal said...

दर्द के मारे रहेंगे दर्द के मारो के साथ ,
शमा रह नहीं सकती अंगारों के साथ ........
lajawab hai boss....

Babli said...

बहुत ही बढ़िया लगा! लाजवाब अभिव्यक्ति!

सम्वेदना के स्वर said...

देवश भाई ..बहुत छोटे हो मुझसे इसलिए यह कहना उचित न होगा कि गहरी चोट खाए लगते हो.. शब्द शब्द गीला है... ज़रा धूल झाडने को हाथ लगाया मोनिटर को तो हाथ भीग गया...हौसला करो ..कह भी डालो!!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

बहुत सुन्दर!! ई फोटोउवा कहाँ से निकाले हो जी !!!

Shekhar Suman said...

bahut hi sundar rachna..
pata nahi kaise chhot gayi thi...
der se hi sahi lekin achhi rachna padhne ko mili.....

Shekhar Suman said...

mere blog par...
तुम आओ तो चिराग रौशन हों.......
regards
http://i555.blogspot.com/

shama said...

Wah! Is rachna ke samne,tippanee ke sab alfaaz,jo mere shabd kosh me hain, ghise,pite lag rahe hain..

आशीष/ ASHISH said...

Yaar Devesh,
Tum sahil banke intezaar karte ho aur hum saagar banke reh-reh kar bhigote hain!
Badhiya mere dost..... Bahut kuchh yaad aaya!

Dimpal Maheshwari said...

gajab likha hain ji.......kyon ki bht dilse likha hain aisa lgta hain....

aryamonika said...

AWESOME!

JHAROKHA said...

behad pasand aai aapki yah rachana.
sasu maa ki aswasthta ke karan allahabad jaana pad gaya tha. ab vah theek hain.
isiliye der se jawab dene ke liye chhama chahati hun.
poonam

Parul said...

devesh ji...sundar rachna!badhai!!

दीपक 'मशाल' said...

बेहतरीन कविता है भाई पर हो कहाँ इतने दिन से?/

एक नज़र इधर भी

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