May 16, 2010

ये कैसा इन्साफ .....

देवेश प्रताप

इज्ज़त किसको प्यारी नहीं होती । हर कोई चाहता है समाज में उसकी एक अलग पहचान हो और इज्ज़त हो । जो कि ये मानव का स्वभाभिक गुण है । आज कल हमारे देश में आनर किलिंग के कई मामले सामने आ रहे हैं । आनर किलिंग का मतलब अपनी इज्ज़त के लिए अपने ही खून के रिश्ते का खून करना । उफ़ कितनी दर्दनाक है ये इज्ज़त जो जान तक लेलेती है । बाप अपने बेटे को भाई अपनी बहन को और एक बेटा अपनी माँ को मार देता है । सिर्फ समाज कि इज्ज़त के लिए । अक्सर इस अनार किलिंग कि शिकार स्त्रियों को होना पड़ता लेकिन लेकिन ऐसा क्यूँ ? क्या इज्ज़त पुरषों से नहीं होती ? लोग कहते है इस बदलते वक्त के साथ आज कि पीढ़ी बहुत तेजी से बदल रही है । रीती रिवाजों और संस्कृति को भूल कर ......पश्चमी सभ्यता कि तरफ बढ़ रहे है । ये हद तक सही भी है । लेकिन ये प्रेम विवाह या किसी से प्रेम करना ......ये सभ्यता तो सदियों चली आरही है ।मुझे तो इसमें कोई बदलाव नहीं नज़र आता . ये एक मानव प्रवृति है कोई इसे रोक नहीं सकता । सिर्फ पहरा लगया जा सकता है । आनर किलिंग में शामिल होने वाले लोग अक्सर अपने आप को बहुत प्रभावशाली मानते है और इज्ज़तदार भी । मुझे तो ऐसे लोग बिलकुल हारे और हतास हुए नज़र आते है ........किसी कि मुहब्बत या ज़िद के आगे इतना हार जाते है कि अंत में उसकी जान लेलते है और ऐसे में वो अपनी जीत समझते है । इस देश में ऐसे न जाने कितनी जाने जाती है । जहां मिडिया पहुँचती है वहां बात सामने आती है जहां नहीं पहुँचती वह ऐसी हत्या के बारे में किसी को कानो कानो तक ख़बर नहीं होती ........ठीक एक साल पहले ऐसे ही घटना हमारे गाँव से तकरीबन ३ कोष दूर एक घटना हुई जिसमें एक बाप ने अपनी बेटी को उस वक्त जहर दे दिया जब घर में कोई नहीं था न उसकी माँ और न उसके भाई बहन ......लड़की को जहर देने के लिए उस लड़के कि बाप ने लड़की के पिता को उकसाया था जिस लड़के से लड़की का कुछ सम्बन्ध था । दरिंदगी तो देखिये कोई कुछ समझ पाता तब तक उस लड़की को धरती कि गोंद में समाहित कर दिया गया था । और फिर सबकुछ शांत होगया किसी ने जुबान इसलिए नहीं खोली क्यूंकि सवाल इज्ज़त का था । किसी कि आत्मा को कष्ट दे कर मारना ये कहाँ का इन्साफ है । अपनी इज्ज़त के लिए अपनों का खून करना ये कहाँ कि बहादुरी है ।

7 comments:

sangeeta swarup said...

सार्थक पोस्ट.....क्या जान ले कर इज्ज़त बची रहती है?

'उदय' said...

...बेहद प्रभावशाली व प्रसंशनीय अभिव्यक्ति !!!

वन्दना said...

saarthak lekhan.........kal ke charcha manch par aapki post hogi.

Parul said...

chaliye kisi ne to mudda uthaya...sarahniy prayas!

कविता रावत said...

अपनी इज्ज़त के लिए अपनों का खून करना ये कहाँ कि बहादुरी है ।
....इसे बढकर कायराना हरकत और क्या हो सकती है...
....सार्थक और प्रेरणाप्रद लेख के लिए धन्यवाद

दीपक 'मशाल' said...

बहुत घिनौना और डरावना लगता है ये सब पढ़ कर सुनकर देवेश क्या कहें अब.. अच्छा चिंतन..

kshama said...

Jaat paat to insaanon ke dalalon ne apni rozi roti ke liye bana rakheen hai..
Ek geet yaad aya:" qudatne to bakshi thi hame ekhi dharti,hamne kahin bharat kahin Iran banaya,
To Hindu banega na musalmaan banega,
Insaan kee aulaad hai,insaan banega!"
Bas yahi ham ban nahi pate..

एक नज़र इधर भी

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