March 25, 2010

महान तो नारी हैं ..........

देवेश प्रताप

भारत देश में 'देवी' कही जाने वाली नारी पर सबसे ज़्यादा अत्याचार होता है ख़ास कर नारी को मात्र एक वस्तु के रूप में देखा जाता है त्याग करना तो इन्हें विरासत में दिया जाता है ....बचपन में अपने माँ-बाप , भाई के लिए शादी के बाद अपने पती और बच्चों के लिए बुढ़ापे में अपने बेटे के लिए इस जीवन सफर में 'ख़ुद ' के लिए वक्त नहीं निकालती , कष्ट के कितने भी थपेड़े आये वो हमेशा सिथिल रहती है .....सिर्फ इसलिए कि उसकी वजह से किसी को कोई दुःख पहुँचे , ........लेकिन कब तक कोई सहन करेगा ........बदलते समय के अनुसार महिलाओं में जागरूकता बढ़ी ......चाहे वो घरेलु हिंसा हो या बाहरी हिंसा उन्हें अपना हक़ समझ आने लगा हाल में जब महिला आरक्षण बिल पास करने कि बात आई तो ......सबसे ज़्यादा चोट हम पुरुषों को हुई ये बात कोई व्यक्त स्वीकार करें या करें महिलाओं का पुरुष से आगे बढ़ जाने का डर सभी पुरुष के मन में आया होगा और ये आना स्वभाभिक था खैर मंथन करने पर ये भी समझ में आगया कि ये ज़रूरत भी है इससे हमारे देश कि सूरत बदलेगी और महिलाओं को पुरुषों के बराबर खड़े होने का मौका भी मिलेगा .....वैसे मेरा मानना है पुरुष और स्त्री एक अमीबा के दो हिस्से है ..........जिसमें कोई छोटा है बड़ा दोनों ही बराबर है
अभी हाल में महिला आयोग ने मांग किया है कि ''पत्नी द्वारा पती के खिलाफ उसकी सहमती के बिना शारीरिक सम्बन्ध स्थापित करने कि प्रक्रिया को बलात्कार श्रेणी में शामिल करें '' बड़ी ही आश्चर्य जनक मांग लेकिन आवश्यक मांग ........ऐसे कानून को तो तुरंत पास कर देना चाहिए अहसासों और प्रेम के बंधन से बंधता है शादी का रिश्ता जहाँ वादें होते है एक दुसरे को खुश रखना और जीवन भर साथ निभाने का .........उसी बंधन में ऐसी जास्ती होने लगी कि ''ख़ुद के पती द्वारा शारीरक अत्याचार किया गया रात का वाकया .... सुबह थाने में उसकी रिपोर्ट लिखवाने जाएगी '' अब ऐसे भी दिन अगये कैसे होता होगा वो व्यक्ति जो अपनी ही पत्नी के भावनों कि कद्र किये बिना शारीरक भूख मिटाता होगा ......उस समय उसमें और एक जंगली जानवर में कोई फर्क नहीं नज़र आता होगा ........ऐसे जाने और कितने कष्ट सहती रही है इस देश के महिलाएं यदि ये कानून पास भी हो जाये .......फिर भी १०० में १य ही महिला अपने पती के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाएंगी ......शादी के बंधन में यदि एक बार गाँठ पड़ती है तो ......वो बंधन कमजोर पड़ जाता है। और भारतीय महिला में उनके द्वारा किसी कि दुनिया उजड़ जाये ये उनसे गवारा नहीं होता ........और फिर ऐसे मामलो के लिए तो मुझे बिलकुल भी नहीं लगता तो क्या पुरुष उनके इसी नारीत्व गुण का फयदा उठाये .........नहीं .........यदि पुरुष तुम अपने आप को महान समझते हो तो .......ये तुम्हारा मिथ है ....... ''महान तो नारी है जो तुम्हे महान बनाने में अपना पूरा जीवन त्याग देती है ''

15 comments:

एक गली जहाँ मुडती है said...

bahut achha
nari mahan hai
tabhi to apne hi
uska shoshan karte
hai .........
achhe mudde uthaye
hai apne
behtrin.........

Suman said...

nice

संजय भास्कर said...

nari to mahan hai..

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

kulwant Happy said...

औरत के प्रति विचारकों में विरोधाभास रहा है।
यहाँ चाणक्य स्त्री को छल कपटी कहता है, वहीं श्री गुरू नानक देव जी उसकी प्रशंसा करते हैं, जिन क्यों निंदिए, जिन जन्में राजान।
और भी बहुत सी मिसालें हैं।

kulwant Happy said...

औरत की दरियादिली को अगर देखना हो तो राम नवमी देखो। जिस श्री राम भगवान ने माँ सीता को ठुकरा दिया था, उसकी औरत आज भी पूजा करती हैं। इससे ज्यादा दियालुता कहाँ देखने को मिलेगी।

आदर्श राठौर said...

सत्य कथन

sangeeta swarup said...

जब ऐसे विचार कोई पुरुष लिखता है तो कहीं ना कहीं एक सुकून मिलता है...कम से कम नारी के त्याग को महत्त्व तो दिया गया...विचारणीय लेखन

दिगम्बर नासवा said...

''महान तो नारी है जो तुम्हे महान बनाने में अपना पूरा जीवन त्याग देती है ''

सत्य लिखा है ... नारीओ की बिना पुरुष अधूरा है ...

SAMVEDANA KE SWAR said...

औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला, जब जी चाहा दुत्कार दिया.
दशकों पहले साहिर साहब का औरत के लिये ये बयान, और आज सत्ता में भागीदारी करती/ भागीदारी को तैयार औरत … समय बदला है, समय एक सा नहिं रहता.. आपकी आवाज़ सार्थक साबित होगी..

आशीष/ ASHISH said...

To bhaiyya Devesh, Naari mahatamya to aap bakhaan kar hi diya!
Ab is havan mein ek purush ki poorn aahuti deta chalun!
Hum to ye jaante hain aur khule aam maante bhi hain, ki zindagi mein jo kuchh achha seekha hai, assi feesad mahilaaon ne hi sikhaya!

संजय भास्कर said...

digambar naswa ji ne sahi kaha hai..
सत्य लिखा है ... नारीओ की बिना पुरुष अधूरा है ...

दीपक 'मशाल' said...

dono ko saman maanna bahut jaroori hai pahle to.. pata nahin kitna samay lagega ye sab badalne me.

Anonymous said...

nari tho mahaan hai hi par ussey bhi jyada us key dwara kiye janney waley kariye or kartviye hai........
wo hamarey pariwar main ma, bahin, beti, dadi aadi aneyk rupo main mozud rehti hai...........
nari tu mahan hai main bas itna hi kehna chanta hu

I love the creation said...

यात्रा नारीयस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः

एक नज़र इधर भी

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