March 13, 2010

आप सब बहुत याद आये .....


देवेश प्रताप


(ये दृश्य मेरे घर के ठीक सामने का है )

विद्यालय में परीक्षा ख़त्म होने के बाद मार्च को घर (प्रतापगढ़ ) चले गए थे , परीक्षा कि वजह से होली में घर जाना संभव नहीं हो पाया था .......इसलिए जैसे ही परीक्षा ख़त्म हुई .....वैसे घर को चले गए ........लेकिन इस बीच आप सभी ब्लोगर्स कि बहुत याद आई ........अब इतनी अच्छी अच्छी रचनाये पढने कि आदत जो पड़ गयी है गाँव जाकर बहुत सुकून मिलता है ऐसा लगता है जैसे यहाँ के जैसे सुख-शांति और कही नहीं .......खैर अब वापस आगया हूँ अब इत्मीनान से सारी पोस्टे पढूंगा जो ...........मेरी अनुपस्थिति में लिखी गयी है .......आप सब ने लगातार विचारों का दर्पण पर विचरण जारी रखा ............आप सब इसी तरह हम सब को राह दिखाते रहे ........और अपने विचार प्रकट करते रहें .......बहुत बहुत धन्यवाद .

11 comments:

M VERMA said...

गाँव तो गाँव है
स्वागत है

Dr. Smt. ajit gupta said...

आपका स्‍वागत है पुन: ब्‍लाग पर। आप गाँव के संस्‍मरण ही लिख दें। हम भी जान ले कि आपका गाँव कैसा है? क्‍या कभी वहाँ ब्‍लागर मीट हो सकती है?

Mithilesh dubey said...

भाई मैं भी गाँव जा रहा हूँ ।

निर्मला कपिला said...

तस्वीर से ही लग रहा है कि तुम्हारा गाँव बहुत सुन्दर है अब तो अपना भी मन उसे देखने का हो रहा है। गुपता जी सही कह रही हैं । सोचो उनकी बात पर। शुभकामनायें

श्याम कोरी 'उदय' said...

...पांच-सात दिनों के लिये मुझे भी जाना है इंटर्नेट के बिना कैसे गुजारा होगा यही सोच रहा हूं!!!!!

दीपक 'मशाल' said...

Wapas aaya dekh khushi hui Vikas bhai.. ummeed hai gaanv se kuchh saundhe sansmaran laye hoge..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आप हमारे दिल में रहेंगे!

Udan Tashtari said...

आओ भाई..हमें भी बड़ी याद आई.

Apanatva said...

hame bhee kuch naya padne ko milega gaon ke bare me...............
shubhkamnae........

Ashish (Ashu) said...

भाई वाह आप तो लकी हो जो गाव घूम आये...स्वाग्त हॆ..

संजय भास्कर said...

तुम्हारा गाँव बहुत सुन्दर है अब तो अपना भी मन उसे देखने का हो रहा है।

एक नज़र इधर भी

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