December 8, 2010

मन में सवालों के हिलोरे

देवेश प्रताप

आज सुबह से मन में कई सवाल हिलोरे रहें हैं | पता नहीं ज़िन्दगी में जिस उंचाई को छूने की तमन्ना है वहाँ तक पहुँच पाउँगा या नहीं , जिस डगर पर चल रहा हूँ यकीनन ये रास्ता उस मजिल की नहीं जाता , फिर मैं क्यूँ उस रास्ते पर बढ़ रहा हूँ ? ऐसे कुछ सवाल पूरा दिन मेरे जहन में उठते रहे | बचपन से नजाने ऐसा क्यूँ रहा जिस रस्ते पर चलने के लिए सोचा उससे हमेशा उल्टा चलना पड़ा , जन्संचारिता की पढाई जब शुरू हुई तो मन में एक ही विचार था की यहाँ से निकलने के बाद पत्रकारिता में कदम रखेंगे लेकिन जैसे जैसे कोर्स आगे बढ़ता गया फिल्म और टेलीविज़न की पढाई आई तो समझ में आया की असली क्षेत्र तो मेरा ये है , जिसमें विडियो एडिटिंग , फोटोग्राफी , विडियोकैमरा , तथा निर्देशन मेरा आकर्षण का केंद्र बनगया हालाकिं अपने आपको साबित करते हुए विडियो एडिटिंग , और कैमरे पर अच्छा अनुभव प्राप्त कर लिया , रही सही निर्देशन तो कॉलेज स्तर के कार्यक्रम में वो भी करके देखा , तथा इलाहाबाद विश्वविदालय पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म भी बनाया | अब अन्तः मन ये कह रहा है की पत्रकारिता का क्षेत्र में क्यूँ उतर आया .......लेकिन उसकी भी एक मजबूरी जिस संस्थान में काम कर रहा हूँ , रखा तो मुख्य रूप से कैमरा और विडियो एडिटिंग के लिए गया था | लेकिन कुछ कारणो से रिपोर्टिंग भी करनी पड़ रही है | जो की मै बिलकुल नहीं चाहता कि मै एक पत्रकार बनू क्यूंकि मेरे अन्दर वो जील नहीं है , हाँ क्रियेटिविटी से जुड़े किसी भी चीज़ के लिए मै तैयार हूँ , चाहे वो लेखन हो या एडिटिंग या निर्देशन | फिलहाल अच्छे वक्त का इंतज़ार है | मन में चल रहे इस उथल पुथल को आप लोंगो के सामने रख कर बड़ा सुकून मिला | ठीक उसी तरह जैसे एक बच्चा परेशान हो कर अपनी माँ से सब कुछ कह देता है , और फिर आँचल में सर रख कर सो जाता है |

11 comments:

अजय कुमार said...

भाई देवेश जी कई बार न चाहते हुए भी समय कुछ भी कराता है । निराश न हों आपको मंजिल अवश्य मिलेगी ,धीरज रखें ।

केवल राम said...

देवेश जी
नमस्कार
जिन्दगी में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं , परन्तु जिन्दगी का सफ़र तो तय करना पड़ता है , और कई बार धेर्य हमें अपने मुकाम तक पहुंचा देता है ....आशा रखिये ...जीवन में अनन्त संभावनाएं हैं ...शुभकामनायें

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

Skaratmak soch ke saath aage badhiye ...... shubhkamnayen....

संजय भास्कर said...

देवेश जी
जिन्दगी में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं
.... ढेर सारी शुभकामनायें.
..... ढेर सारी शुभकामनायें.
...... ढेर सारी शुभकामनायें.
....... ढेर सारी शुभकामनायें.

kshama said...

Harek ke jeevan me aisi uthal puthal machi rahti hai shayad! Mere bhee! Kayi baar samajh me nahi aata ki jo kar rahi hun,wo mera dhyey hona chahiye ya kuchh aur!

Sanjeev Kumar Sharma said...

aage kadam,aage kadam,aage kadam..
mitro dharo balidaan k path par kadam..path band hai pichhe achal aur pith par dhakka prabal..mat soch kar le faisla,le baho me utsaah bhar..jivan samar k sainiko,sambhav asambhav ko karo,kan kan nimantran de raha,aage kadam,aage kadam...

Sanjeev Kumar Sharma said...
This comment has been removed by the author.
वीना said...

विश्वास रखिए, हौसला रखिए मंजिल जरूर मिलेगी...

http://veenakesur.blogspot.com/

निर्मला कपिला said...

अरे आप निराश? कभी सोच ही नही सकती।
कर्म और आत्मविश्वास ही हैं सफल संकल्प
मंजिल पाने के लिये नही और कोई विकल्प
नई सुबह लाने को सूरज को तपना पडता है
धरती की प्यास बुझाने बादल को फ़टना पडता है
मंजिल तक ले जाती है आशा की एक लकीर
तनिक धीर धरो राही बदल जायेगी तकदीर।
ये पँक्तियाँ आपके लिये हैं। बहुत बहुत शुभकामनायें, आशीर्वाद।

Babli said...

जीवन में उतार चढ़ाव तो लगा ही रहता है! हौसला रखिये आपको मंज़िल ज़रूर मिलेगी! शुभकामनायें!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

MAN with a MISSION said...

devesh bhai.......
tension mat lijiye...
samay se pahle our bhagy se jayda kuch nahi hota hai..
aaj tak jitne bhi achche director huye hain ,pahle wo ek safal reporter hi the.

एक नज़र इधर भी

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