June 23, 2013

प्रकृति से दो टूक

देवेश 

 हम बूँद बूँद को तरसे
तुम वहाँ इतना क्यूँ बरसे
हमको मारा बिन पानी
उनको मारा पानी पानी में
तुम कहते हो ये मेरा प्रतिशोध है
मैं कहता हूँ उन निर्दोषों क्या दोष है ॥

February 22, 2013

पहली हकीकत हो तुम...

ओस की बूँद जैसी  मासूम हो
तुम
तारे की धीमी रौशनी की साज हो
तुम
फूल की पंखुड़ी जैसी सख्त हो
तुम
सावन के झूले सी मदमस्त हो
तुम
मेरी दुनियां में सबसे अनमोल हो
तुम ,
मेरे सपनो की दुनिया की
पहली हकीकत हो
तुम ॥ 


December 31, 2012

कुंठित मानसिकता ...

2012 विदा होते हुए अपनी कई सुख और दुःख भारी यादें दे गया | इन यादों में सबसे दर्दनाक यादें हैं "भारत की बहादुर बेटी की विदाई" इस बेटी के जाने के सदमें में पूरा देश डूबा है तथा अपराधियों के खिलाफ उबरा जनसैलाब भी वाजिब है | अब सवाल ये उठता हैं कि ऐसी घिनौनी हरकत करने वाले होते कौन हैं , लगतार सामूहिक बलात्कार अथवा बलात्कार के बाद हत्या करने वाले दरिंदे किस समाज से ताल्लुकात रखते हैं ? ऐसी कुंठित मानसिकता के शिकार लोग बहुत ही नीचे तबके के होते होंगे लेकिन ये भी गंवारा नहीं कि ऐसी मानसिकता के लोग सिर्फ नीचे तबके के हों | यदि ऐसा होता तो बुद्धजीवियों के दफ्तर में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के किस्से न्यूज़ पेपरों में ना छपते होते| मेरा ये मानना है ऐसी हरकत करने वाले लोग उस मानसिकता से हैं जिन्हें महिलाओं को अपने बराबर खड़ा होते देख सहन नहीं होता , महिलाओं की आज़ादी देख अपने आप में कुंठित हो जाते हैं | अफ़सोस इस बात का है ऐसी सोच का बीज हमारे देश में शुरू से बोया गया था | पुरुष और महिलाओं बराबरी का दर्ज़ा ना देकर | अगर ऐसी ही कुंठित मानसिकता रही तो हमारे देश में ऐसे हादसे कभी नहीं रुक पायेंगे | जरूरत है सोच को बदलने की |

December 18, 2012

बड़े दुःख की बात...

भारत की राजधानी दिल्ली, जिसकी महिला मुख्यमंत्री ...उसी राज्य में ..आये दिन महिलाओं के साथ बलात्कार छेड़छाड़ के मामले सबसे ज़्यादा हैं | बड़े दुःख की बात है ...अपराधी कहीं ना कहीं इतने बेकौफ हैं कि कानून और सरकार को अपनी चुटकी में लेकर अपराध को अंजाम देते हैं...| चलती बस में रेप की खबर न्यूज़ पेपर से लाकर न्यूज़ चैनल तक .....ब्लॉग से लेकर फ.बी के हर पेज़ तक इसकी चर्चा रही ....लेकिन सवाल सिर्फ चिल्लान
े तक नहीं ....सवाल ये है ,ये हादसे कब तक राजधानी को शर्मसार करते रहेंगे ? आज हंगामा कल फ़िर सब शांत होंगे .....अगर इस हंगामे का कोई अंजाम होता तो इस राजधानी में 2012 oct. तक रेप के 580(नेशनल दुनिया न्यूज़ पेपर के अनुसार ) मामले ना होते | ऐसे हादसे जब होते हैं तब मुख्यमंत्री के दफ्तर से लेकर संसद तक शोर होता हैं ....और फ़िर जैसे जैसे वक्त गुजरता है ....शोर की गूंज धीमी हो जाती हैं |
क्या बीत रही होगी उस पीड़ित बेटी के माँ - बाप पर जो जिंदगी से लड़ रही है ....क्या बीत रही होगी उस लड़की के दोस्त पर जो अपनी पूरी ताकत लगाकर चलती बस में ...उन दरिंदों से बचा नहीं पाया | ये सोचने के बाद दिमाग में यही आता है ऐसे अपराध को अंजाम देने वालों को सरे - आम फांसी दे देनी चाहिए | जिससे फ़िर कभी कोई अपराधी ऐसा अपराध करने से पहले अपने मौत को निश्चित कर लें |

December 17, 2012

कितने लाइक आते हैं

हीरो - हिरोइन पे बहुत लाइक आते हैं ...आज देखते हैं इस शहीद जवान पर कितने लाइक आते हैं" ऐसे कमेन्ट अक्सर फेसबुक पर देखने को मिल जाता है ... मै ऐसे कमेन्ट करने वाले से ये कहना चाहता हूँ ....रील लाइफ के हीरो-हिरोइन से उनकी कोई तुलना नहीं ....उनकी कीमत तो वो भी समझतें और लाइक करतें हैं जो फेसबुक से भी अनजान हैं ....हमारे देश के जवान की कीमत खेत में हल चला रहा किसान और ऑफिस में बैठा एक ऑफिसर भी समझता और "लाइक" करता है ....उनकी कुर्बानी चंद "लाइक" की मोहताज नहीं |

December 16, 2012

भगवान से डर...

अक्सर ऐसे फारवर्डड मैसेज आते है कि "इस मैसेज को दस लोगों को फारवर्डड करके देखिए आपके जीवन में तुरन्त खुशियाँ आएगी .....यदि इसे डिलीट किया तो आपके साथ अनहोनी हो जायेगी" मै समझ नहीं पाता ऐसे मैसेज निर्मित कौन करता है ..वो भी भगवान के नाम पर ...ऐसा कौन इंसान होगा जो अपनी ज़िंदगी में खुशियों के बजाय दुःख झेलना चाहेगा ....ऐसा मैसेज आने के बाद ऐसा प्रतीत होता है ...सर पे किसी ने आस्था के नाम कि बन्दूक लग
ा दी हो और बोल रहा हो ऐसा कर नहीं तो मर ....मरता क्या ना करता ...जीवन किसे नहीं प्यारा ....दस लोगों को मैसेज फारवर्डड कर दिया अब उसके सर से बोझ हटा अब अगला झेले ...लेकिन ये सब आस्था के नाम पे क्यूँ ...क्या भगवान भी डरा डरा के अपने समर्थक बढ़ाते हैं | हाल ही में आयी एक हिंदी फिल्म "oh my god" आस्था के नाम पर मची लूट खसोट का जबर्दस्त विवरण है ....इस फिल्म में ये साफ़ दर्शाया गया है भगवान को लोग प्रेम से नहीं डर से मानते हैं | हालाँकि फिल्म अपने उद्देश्य में खरी उतरी कि भगवान को डर से नहीं प्रेम से मानो....ये तो फिल्म कि बात रही | लेकिन असल ज़िंदगी में भी ये बात खरी उतरती है | हमें भगवान से डर है प्रेम नहीं ||

June 6, 2012

सन्नी लियोन का आगमन ......

देवेश प्रताप

भारत के लोगों की एक खास विशेषता है ....हम उस चीज़ को ज़्यादा महत्व देतें है ...जो बाहर से आई होतीं है ......ये खास कर बॉलीवुड में खूब देखने को मिलता है | आज कल सन्नी लियोन की चर्चा खूब है ...शायद इसलिए कि वो पोर्न स्टार हैं | बिग बॉस में उनको भारत आने का न्योता मिला .....और अब भारत में ही बस गयीं ......बसें भी क्यों ना हिंदी फिल्मों में काम करने का मौका जो मिल गया है ....अब उन्हें औरों कि तरह अपने आप को स्टार जो बनाना है .......फिल्मों में लाने का नेक काम महेश भट्ट ने किया .......सन्नी लियोन को लेकर बाप-बेटी यानी महेश और पूजा भट्ट जोर शोर से प्रचार में लगें हैं .........हद तो तब हो गई जब पूजा भट्ट ने सन्नी के अन्तः वस्त्र को नीलाम करने का एलान किया .........आखिर पूजा भट्ट साबित क्या करना चाहती हैं ? क्या भारत के लोग फिल्मों में सिर्फ वासना को ही पसंद करते हैं .........| ये बात तो साफ़ है सन्नी लियोन को फिल्म इंडस्ट्री में लाने का मकसद है कि उनके जिस्म से पैसा की उगाई करना .......मुझे तो नहीं लगता उनके अंदर कोई कलाकार जैसे गुड़ होंगे .........| इस जिस्म बाजारी के खेल में .......भला एकता कपूर कैसे पीछे रहतीं उन्होंने ने भी ........लगे हाथ सन्नी से एक फिल्म साइन करा ली | अब धीरे-धीरे सन्नी के बिरादरी के लोग भारत में प्रवेश करेंगे .........और फ़िर यहाँ के निवासी बनकर अपने हक़ की लड़ाई लड़ेंगे ,"आखिर उनका हक़ जो बनता है" उनकी मांग शायद ऐसी कुछ होंगी "हमारी पोर्न साइटों को IRCTC जितना दर्ज़ा दो , हमारे काम को बढ़ावा दो " उस समय सरकार क्या निर्णय लेगी वो सके विवेक पर निर्भर करेगा | और फ़िर क्या...... राज्य सभा में बैठने के लिए न्योता दिया जायेगा , पद्मभूषण से सम्मानित किया जायेगा .........कितना हास्यास्पद होगा जब ऐसा होगा ..

June 3, 2012

क्या लिखूं .....

देवेश  प्रताप

बहुत दिनों बाद लिख रहा हूँ ...लेकिन एक बात तो सत्य है ....कि  इस ब्लॉग को बहुत मिस करता हूँ .....आज  ब्लॉग खोल कर जब लिखने बैठा तो सोचा क्या लिखूं कहाँ  से शुरू करूँ क्या शुरू करूँ .......तो ख्याल आया यदि आधुनिकता की ये दुनिया ना होती तो ये ब्लॉग ना होता यदि ब्लॉग ना होता तो ...इतनी सुंदर रचनाएँ , अनेको विचार और भावनाओं की नदियाँ कहाँ बहती.....शायद खुद की डायरी में या फ़िर बिखरे पन्नों में |  मुझे याद है, इलाहबाद में मेरे रूम पार्टनर अक्सर आपनी बातों को चंद  पन्नों पर संजो देते थे | एक दिन कोई किताब ढूंढते हुए मैं उनकी अलमारी तक पहुँचा चार पांच पन्ने मेरे हाथ लगे जिसे मैं अलगकर किताब ढूँढने में लग गया ...हालाँकि किताब नहीं मिली ...अंततः ..उन पन्नों को उठा कर आलमारी पर रखते वक्त मेरी निगाह कुछ शब्दों पर रुक गई ...ना चाहते हुए भी उन पन्नों पर निगाह दौड़ने लगी  .......हालाँकि कुछ भी पर्सनल जैसा नहीं था .......लेकिन जो भी लिखा था वो एक दर्द ,असमंजस  और तमाम उन बातों का जखीरा, जो शायद किसी से बयाँ नहीं किया जा सकता ......शाम को मैंने उनसे पूछा कि "आप इन सब बातों को लिखते क्यों हैं...इससे क्या फायदा" ......उन्होंने कहा "सुकून के लिए" ये बात मेरे बहुत दिनों तक समझ में न आई .... .....लेकिन जब से मैंने ब्लॉग की  दुनिया में कदम रखा और शब्दों को संजोना शुरू किया ......तब समझ आया कि अपनी बातों को लिख कर व्यक्त करने में कितना सुकून मिलता है | .....ओह ये लिखते-लिखते क्या उलूल-जुलूल लिख डाला ...खैर कोशिश रहेगी कि निरन्तर कुछ ना कुछ इस ब्लॉग पर परोसता रहूँ ...........

March 14, 2012

ख्वाहिशों में जगे सपने ....

देवेश प्रताप

घोंसलों से निहारती आँखों में आस्मां से
लिपट जाने का सपना है ,

गुलाब की कलियों को खिल कर
मुस्कुराने का सपना है,

बादलों में लिपटी पानी की बूंदों को
ज़मीं को छू लेने का सपना है ,

कौन जाने इन सपनो को कब मंजिल
मिलेगी फिर भी

ख्वाहिशों में जगे हर सपने को पूरा
कर लेने का सपना है |

January 3, 2012

नई शुरुवात ....

देवेश प्रताप

ज़िन्दगी की नई शुरुआत के साथ ....फिर से मुख़ातिब हूँ आप सब से | 25 नवम्बर 2011 को एक सफलता हासिल हुई जिसकी कसमकस काफी दिनों से चल रही थी | वो कसमकस थी हमारे प्यार की ......25 नवम्बर को मैं और मेरी जीवन संगनी सपना शादी के अटूट बंधन में बंध गए | बस अब आप सब की शुभकामनयें और प्यार हमारे साथ ....है |
हमारे तरफ से आप सभी को नए वर्ष की ढेर सारी शुभकामनयें |

September 10, 2011

एक शुरुवात



पाईरेसी रोकने की एक मुहिम । देवेश ,जय तथा मोहन के सहयोग से इस वीडियो को बनाने में सफलता प्राप्त हुई ।

September 5, 2011

शिक्षक दिवस

देवेश प्रताप

ये रचना हमारे सभी शिक्षकों को समर्पित है .....धन्यवाद

माँ ने ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाया
किस राश्ते पर कैसे चलना है वो आपने बतलाया ॥

गीली मिटटी के लोए कि तरह कोई अकार न था
ज्ञान की चाक पर आपने हमारा अकार बनाया ॥

जब भी बहके , जब लडखडाये अपने कदम से
सख्त हो कर आपने हमें सम्भलना सिखाया ॥

हर सवाल कठिन था , हर जवाब मुश्किल था
ज्ञान के प्रकाश हर सवाल का जवाब और हर जवाब को आसां कर समझाया ॥

August 27, 2011

बहुत हो गया जुल्म

देवेश प्रताप

बदल देंगे इतिहास
ये हुंकार भरते हैं ॥
ये जनता की है आवाज
जिससे हुकमत संवरती है ।

बहुत हो गया जुल्म
अब हम नहीं सहेंगे ॥
मांग के देखो घूंस
तुम्हे हम होश में लायेंगे ॥


शर्त इतनी है ये इरादा न बदले
ये बदलाव का सूरज शाम को न डूबे ॥

August 23, 2011

जनता बेवकूफ नहीं है

देवेश प्रताप

भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अन्ना हजारे के आन्दोलन में कुछ लोग इसके ख़िलाफ़ बोल कर अपनी अलग ख्याति बटोर रहें हैइसी तरह एक फ़िल्मी दुनिया के महानुभाव महेश भट्ट निर्माता निर्देशक दिया कि '' जहाँ झूट बोला जाता हैं जनता वहीँ जाती है ......और झूट बोलना हम लोगों का काम है '' मतलब जनता बेवकूफ है तुम फिल्म बनाते हो और जनता बेवकूफों कि तरह फिल्म देखने चली जाती है ....वैसे तर्क जो भी रहा हो ....इस बात से तय है की अपने दर्शकों के लिए कोई इज्ज़त नहीं महेश भट्ट के अन्दरवैसे ऐसे मदारियों के बोलने से लोगों पर कोई फर्क नहीं पड़ता हैफिर भी इनकी सोच तो देखिये उस जनता को ये बेवकूफ समझते हैंजिनके वजह से इनकी रोजी -रोटी चलती हैऔर भट्ट साब आपको लग रहा है आज पूरे देश में जोलोग इस क्रान्ति में शामिल है .....वो लोग बेफकूफ है ......तो ये आपकी गलत फहमी हैये वो जनता है जो आपके द्वारा बनायीं गई फिल्मो को जब पसंद करती है तो सर चढ़ा लेती और पसंद नहीं आती तो लात मार देती हैक्यूंकि जनता इतने भी बेवकूफ नहीं हैये एक मुहिम है भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने कीजो आज तक नहीं हुई है और शायद आगे कभी देखने को भी नहीं मिलेगी .......यदि भ्रष्टाचार से हर इंसान त्रस्त होता तो यूँ सड़को पर जनांदोलन करता

August 21, 2011

हर इंसान भ्रष्ट है

देवेश प्रताप

भारत की जनता अब त्रस्त हो चुकी है भ्रष्टाचार से ......इस भ्रष्टाचार के खिलाफ छिड़ी मुहिम में प्रत्येक वो व्यक्ति शामिल है ...जो आज तक भ्रष्टाचार का शिकार हुआ है ...और जो करता आया है ..सिर्फ चन्द नेताओं को छोड़ कर . जो भ्रष्टाचार का शिकार है ..उसका शामिल होना तो स्वभाभिक है .....लेकिन वो जो करता आया है वो भी त्रस्त हो गया है ......किसी कर्मचारी ने कुछ पैसे लेके फ़ाइल आगे बढाई है ...तो वही कर्मचारी अपने बेटे का अच्छे स्कूल में प्रवेश कराने के लिए डोनेसन देता है . उस स्कूल के प्रबंधक ने स्कूल को मान्यता प्राप्त करने के लिए सम्बंधित संस्था को पैसा खिलया होगा .......स्वभाविक तौर पर अंत में चक्कर काट कर घूसखोरी की रकम किसी नेता की झोली में गिरा होगा .......फलस्वरूप उस कर्मचारी ने पैसा खाया क्यूंकि उसको अपने बेटे को अच्छे स्कूल में प्रवेश दिलाना था ......स्कूल के तरफ से डोनेसन इस लिए लिया गया क्यूंकि उसने स्कूल की मान्यता प्राप्त करने में पैसे खर्च किए थे .......सम्बंधित संस्था ने पैसा खाया क्यूंकि उसे मिनिस्ट्री में पैकेट के साथ हाजरी लगानी होती है . तो ऐसे शुरू होता है भ्रस्टा चार की कड़ी ..............लेकिन ज़रा गौर कीजिये वो व्यक्ति जिसने कर्मचारी को पैसा खिलया वो कौन था .....वो एक गरीब लाचार और असहाय बाप था ..जिसे अपने बेटे के मृत्युप्रमाणपत्र बनवाना था . यदि वो पैसे न देता तो मृत्य प्रमाणपत्र न बनता ........प्रमाण पत्र न बनता तो .......जिस ईमारत के निर्माण में मजदूरी करते समय कच्ची छत गिरने से मौत हुई थी .........जिसके लिए सरकार की तरफ से कुछ मुवाजा मिलना था.......तो शायद वो न मिलता .........यदि मुवाजा न मिलता ...तो शायद अखबार के किसी कोने में एक खबर छपती ....'कर्ज में डूबा एक परिवार के चार सदस्य जहर खाकर आत्म हत्या कर ली' .शायद इसलिए हर इंसान भ्रष्ट है ........और अब त्रस्त है .

August 18, 2011

देश की दसा

देवेश प्रताप

यदि किसी तीसरी दुनिया से चंद्रशेकर आज़ाद , महात्मा गांधी ,सरदार बलभ भाई पटेल तथा वो तमाम क्रांतिकारी जिनका नाम इतिहास के पन्नों में भी नहीं वो भारत की इस दसा को देख रहे होंगे तो ....वो क्या सोच रहे होंगे ? वो आपस में यही चर्चा करते होंगे की जिस देश को आज़ाद करने में अपने खून के एक एक कतरे को कुर्बान कर दिया . उस देश को ये तानाशाह नेताओं ने फिर से गुलाम बना दिया . फर्क इतना इस गुलामी को चोला दूसरा है . आम जनता अपने मेहनत की कमाई इकठ्ठा कर के टैक्स जमा करती है . और उस टैक्स की रकम से नेता अपने बिस्तर की चादरें बदलते हैं .

जनता के हक की आंधी क्या चली सरकार ने अपना संतुलन ही खो दिया ......वो क्या कर रही उसे खुद नहीं समझ में आ रहा ...कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने अपनी जुबान पे लगाम भी लगाना बंद कर दिया है ........और इनकी बेशर्मी की हद तो देखिये खुद को मिडिया के सामने दूध की तरह साफ़ बता रहें हैं ...........

August 16, 2011

.भ्रष्ट सरकार की भ्रष्ट कहानी

देवेश प्रताप

इस भ्रष्टाचार पर पेश है एक नाटक ....... जिसका विस्तार कुछ इस तरह है .......''चारों तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन फैला ऐसे में सबसे बड़ी समस्या कांग्रेस के नेताओं को है.....

राहुल देखता है कि चारो तरफ सरकार के खिलाफ नारेबाजी हो रही है ...ऐसे में परेशान होकर दौडकर अपनी माँ के पास आता है ..


राहुल -: माँ -माँ बाहर बहुत हंगमा मचा हुआ ..लोग अपने ही खिलाफ नारा लगा रहे है ...


सोनिया -: ओहो ...इतनी बात से परेशान हो जाता है ....अरे ये तो बेवकूफ जनता है इसका तो काम ही यही ...है


राहुल-: (घबराकर) लेकिन माँ ऐसे मे मेरा राजनीतिक भविष्य न चौपट हो जाये ....मै जा के कुछ बायन दूँ क्या ..


सोनिया-: (दिलासा दिलाते हुए ) अरे नहीं पगले ....तुझे यहाँ कुछ नहीं बोलना ...जहा मै कहू वही बोलकर .......बाकी के दरबारी है... वो बोलेनेगे .......वैसे भी तू अभी इन सब मामलो में अभी छोटा है


तभी वहाँ दौड़े दौड़े कपिल आते है .....


कपिल-: अरे मेम साब अब तो गजब हो रहा ये अन्ना तो मानने को तैयार ही नहीं .......(अपने आप को संभालते हुए ) वो तो लंगोट वाले को तो उस बार धक्का मुक्की देके जबरदस्ती भगा दिये थे ......अब इसके साथ क्या किया जाय ??


सोनिया-: हुम्म ...इतने वर्षों में जब किसी और कि सरकार ने लूट खसोट किया तो कुछ नहीं ......हमारी सरकार थोडा लूट खसोट ....कर रही तो सब पीछे ही पड़ गये है .........मै भी किसी से कम नहीं इस को पकड़ कर सीधा जेल में डलवा दो ...


राहुल-: (कोसते हुए ) मै सब समझ रहा हूँ .....ये सब राजनीति में घुसने का प्रयास कर रहें है .......मेरे समझ में नहीं आ रहा में मेरा क्या होगा ......(.परेशान है ) .


तब तक वहाँ दिग्विजय भी पहुँच चुके होते है ...


दिग्विजय - अरे बेटा तुम्हे परेशान होने कि ज़रूरत नहीं है .......मै ऐसा वार करूँगा कि साँप भी मर जायेगा और लाठी भी नहीं टूटेगी ...


राहुल - मतलब


दिग्विजय - अरे यही जेल भेजवा कर मीडिया के सामने उन्हें गलत साबित कर देंगे .....देखो हम भ्रष्ट है यह तो पूरी दुनिया जान चुकी है ....तो क्यूँ न अब सारे दाँव-पेंच अजमा लिए जाए


सोनिया -( दिग्विजय को ऑर्डर देते हुए ) और हाँ ...जो और अपने दरबारी हैं उनको कह दो ..बयानबाजी करते रहे है सरकार की तरफ से


इतने में प्रणव भी वहाँ पहुचते है ..


राहुल -- आप कहाँ थे प्रणब अंकल


प्रणव - अरे बस आही रहा था कमबख्त आंदोलनकारियों ने पूरा रास्ता जाम कर रखा है ...


राहुल - अंकल आप को देख लग रहा है की इस आन्दोलन से आप पर कोई फर्क नई


प्रणव - अरे भाई ..हम बेशर्म नेताओ पर ऐसी छोटी-मोटी बातों का असर पड़ने लगेगा तो हम राजनीति कैसे करेंगे ....


प्रणब की बात पूरी करते हुए दिग्विजय कहते हैं ..


दिग्विजय - बिलकुल और ये भूख की मारी जनता कितना दिन आंदोलन करेगी ......


तभी प्रणव के मोबाइल बजता है ...


फोन पर दूसरी तरफ -- सर क्या करें भीड़ तो बढती जा रही है ...


प्रणव फोन पर -- अर्रेस्ट कर लो सब को


दूसरी तरफ - सर लेकिन ये तो जास्ती होगी


प्रणव -- जितना मै कह रहा हूँ उतना करो बाकी में देख लूँगा ..


दूसरी तरफ - जी जी सर .


फोन रखते हुए ...सब की नज़रे प्रणव पर टिकी हैं ..


सोनिया - क्या हुआ ..


प्रणव -- कुछ नहीं ...खुशी मनाओ अब वो अरेस्ट हो जायेगा .....सब शान्ति पड़ जायेगी


दिग्विजय - मैम ....वो टीवी चैंनल वालों के लिए पैकट तैयार कर दीजिए ....ताकि मिडिया उसे ज़्यादा कवरेज न कर सके


सोनिया - हाँ ...वो तो ठीक है लेकिन पिछली बार बाबा वाले आन्दोलन में तो मिडिया ने इनकार कर दिया था तो इस बार मानेगी की नहीं ..


कपिल - कोशिश करके देखते हैं ...


राहुल - कर लो जो आप लोग जो करना चाहते हो ...लेकिन मुझे ऐसा लग रहा है की हमारी भ्रष्ट रुपी जहाज ...इस निश्छल रूपी जनता के सागर में डूब जायेगी ..




सभी प्रश्नवाचक नज़र से राहुल की तरफ देखते है ...और पर्दा गिरता है .




तो दोस्तों कैसा लगा यह नाटक ....भ्रष्ट सरकार की भ्रष्ट कहानी .



August 15, 2011

आज़ाद भारत

देवेश प्रताप


आज भारत 64 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है .....आज़ाद भारत जहाँ हरभारतीय आजादी की सांस ले रहा है | बीते 64 सालों में भारत अपनी तरक्की काफी तेज़ी सी की है | शिक्षा , व्यसाय ....तथा तमाम क्षेत्रों में तरक्की हुई . ये हमारे लिए खुशी की बात है. जिस भारत की कमर टूटचुकी थी वह अब फिर से अपनी कमर सीधी करके खड़ा होरहा है . लेकिन अफ़सोस इस बात का है ......कि इस आज़ाद भारत में लोग आपस में एक दूसरी की आजादी छीनने में जुट गए है
. ...धर्म , जाती , क्षेत्रवाद जैसे बेफजूल मुद्दे पर लोग आपस में लड़ना शुरू कर दिया है ...जो हमारे देश के लिए सबसे घातक साबित हो रहा है ..........हमारे देश में कहा जाता
है ''अनेकता में एकता है '' लेकिन हमें लगता यह अब केवल एक मुह बोली कहवात रह गई ......धर्म के नाम पर हम दंगा करते है .......जाती के नाम पर ऊच -नीच का विभाजन करते हैं ........क्षेत्रवाद के नाम पर अपने ही देश के लोगों को पारये की तरह व्यहार करते है . ...... तो काहे बात की एकता . इन सब के लिए हम खुद ज़िम्मेदार समाज का हर इंसान बुरा नहीं होता कोई एक-दो ही बुरा होता है ....फर्क इतना होता है ..वो बुरा इंसान अपने बुराई फ़ैलाने में कामयाब होता . और जो नेक है .....वो चुप-चाप ...उस बुराई को देखता और सहता है ........आज़ादी हम सब की रगो में होना चाहिए ........जिस दिन इस बात का एहसास खुद को हो जायेगा उस दिन किसी गली में धर्म क नाम पर दंगे नहीं होंगे .......जाती -पाती का कोई भेदभाव नहीं होगा ......और न ही क्षेत्रवाद के नाम पर .....उत्तरी और पश्चमी भारत कहा जायेगा |.........यदि ऐसा होगा तो शहीदों की कुर्बानी यूँ जाया नहीं जायेगी | शहीदों के लिए किसी ने क्या खूब कहा ......

इनके माथे पे है खून का टीका
देखो देखो ये रोली नहीं है
थक गया वीर जब लड़ते लड़ते
माँ की ममता तड़प कर ये बोली
आ मेरे लाल गोदी में सो जा
अब तेरे पास गोली नहीं है ......

इस स्वतंत्रता दिवस पर आप सब को ढेर सारी बंधाईयां | जय हिंद , जय भारतमाता .

August 13, 2011

रक्षाबंधन

रक्षाबंधन के पावन अवसर ''विचारों का दर्पण '' कि ओर से आप सब को ढेर सारी बंधाइयां .






August 9, 2011

'भ्रष्ट रहो वरिष्ठ रहो'

देवेश प्रताप



बहुत दिन हो गए ब्लॉग पर राजनीति , समाज पर कोई चर्चा नहीं हुई क्यूंकि समय नहीं मिला .....और जब समय मिला तो आलस्य से लैपटॉप के कीबोर्ड पर उंगलिया नाचने से मन कर दी खैर आज लिखने का मन किया तो सोचा कुछ लिख ही देता हूँ .......भ्रष्टाचार पिछले कुछ दिनों से सबसे ज्वलनशील मुद्दा बना है ......कोई अनसन कर रहा है तो कोई रैली .....इस बार आम जनता भी किनारे -किनारे से वरोध कर रही है लेकिन मेरे समझ में ये नहीं आया की आखिर भ्रष्ट कौन है .....सरकार भ्रष्ट हो नहीं सकती .....सरकारी अफसर तो बेचारे पूरे दूध की तरह साफ़ है .......आम जनता भ्रष्ट होकर भी क्या करलेगी .....तो भ्रष्टाचार फैला कहाँ से ?......आप स्वयं ध्यान दीजिए ....अभी तक जितने भ्रष्टाचार के मामले उभरे हैं .........और उस मामले की जितने भी आरोपी है .......वो बेचारे कहा भ्रष्ट है .....वो तो सरकार से दुहाई लगा रहे ......की ''मैंने किया क्या है ....बस देश के पैसे को अपना समझ कर बैंको में इकठ्ठा कर लिया .....अब इसमें मेरी क्या गलती '' ............बिलकुल सही कहना है इनका ......बेवजह बेचारों को जेल भेज दिया है ......हलाकि जेल एकदम पांचसितारा होटल की तरह तो तकलीफ कोई बात नहीं है ..........अब आपने २०० -३०० रु की चोरी थोड़ी न की है की पाँव में बेड़ियाँ जड़ी हो ....... common wealth खेल की CAG रिपोर्ट आई तो विपछ के नेता तो पीछे ही पड़ गए ....शीला दीक्षित जी को कुर्सी से उतारने के लिए ......अरे भाई इतनी उम्र होगयी है कुछ अपने भविष्य का भी ख्याल रखेंगी की नहीं ....या सिर्फ देश के बारे में सोचती रहेंगी ..........अब रख लिए होंगे कुछ पैसे जमा करके ......अब विपछ से ही पूछिए के उनको अगर मौका मिला होता तो क्या वो .....दो -चार इधर -उधर न किए होते .........हम तो कहते है जाने दीजिए क्यों बुढ़ापे में लोग उन्हें परेशान कर रहें हैं ........... भ्रस्टाचार करने वालों को 'भ्रष्ट रहो वरिष्ठ रहो '' का नारा लगाना चाहिए हमें तो लगता ....अब बड़े बड़े दिगज्जों के बीच ये होड़ लगी होगी किसने कितना बड़ा घोटाला किया .....किसने कितने पैसों को गबन किया ??
हद हो गई बेशर्मी की .........आरोप लगता है तो कहेते है कि ''इस आरोप को पूरी तरह साबित करो ........की हम भ्रष्ट है'' अरे देश को लूटने वालों .......एक बार ज़रा इस देश के बारें में भी सोचा करो ..........जब तुम आपनी तिजोरियां भरते हो ......तब इसी देश के मध्यमवर्गीय परिवार का एक सदस्य ......ये सोचता है की बच्चे की फीस कैसे जमा होगी .......घर का खर्च कैसे चलेगा ........ये तो छोडो ज़रा उनके बारे में सोचो ...जिनका पूरा दिन एक वक्त की रोटी के इन्तजाम में बीत जाता है अगर इस बारे में ज़रा से भी सोच लो तो शायद तुम्हारी आत्मा तुम्हे भ्रष्ट होने से पहले तुम्हे रोक दे

एक नज़र इधर भी

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